दीप पर्व २००९
दीप भरे हमने
घी से, तेल से, मोम से और पता नहीं किस-किस से...
पर वे भरते हमें रोशनी से
ताकि निहार सकें हम
चहुँ-ओर...
लेकिन गुजारिश है मेरी आप से
कि आप भरें हमें अपने आशी:वचनों से
इस २००९ के दीप पर्व पर
जिससे सचमुच हम
निहारने-लायक बन सकें
बाहर से भीतर तक
आस-पास
सब ओर
और
कम से कम अपनी ओर तो जरूर..
--वृ. प्र. जैन
घी से, तेल से, मोम से और पता नहीं किस-किस से...
पर वे भरते हमें रोशनी से
ताकि निहार सकें हम
चहुँ-ओर...
लेकिन गुजारिश है मेरी आप से
कि आप भरें हमें अपने आशी:वचनों से
इस २००९ के दीप पर्व पर
जिससे सचमुच हम
निहारने-लायक बन सकें
बाहर से भीतर तक
आस-पास
सब ओर
और
कम से कम अपनी ओर तो जरूर..
--वृ. प्र. जैन
17-10-09
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